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विमोचित प्रजातियाँ

कोलख 12207 (इक्षु-6)

  • किस्म : कोलख 8002 (अगेती)
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व क्षेत्र विशेषत: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं असम आदि।
  • परीक्षण के दौरान औसत गन्ना उपज 75.42 टन प्रतत हेक्टेयर पायी गई जो कि क्षेत्रीय मानक किस्मों से 10-15% अधिक थी।
  • इस किस्म में बुआई के दस माह बाद कटाई के समय रस में शर्करा की मात्रा 17% से ज्यादा और पोल प्रतिशत केन लगभग 13.17% पाया गया।
  • समय से कटाई करने पर इस किस्म की पेड़ी अत्यंत उत्तम होती है।
  • यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति मध्यम अवरोधी है तथा इसका गन्ना मध्यम मोटा और हल्का पीलापन लिए हुए हरे रंग का होता है। इसका अगोला गहरा हरा तथा पत्ती सीधी होती है।

कोलख 12209 (इक्षु-7)

  • किस्म : कोलख 12209 (मध्य देर)
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-मध्य व उत्तर-पूर्व क्षेत्र विशेषत: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं असम आदि।
  • परीक्षण के दौरान औसत गन्ना उपज लगभग 77.5 टन प्रति हेक्टेयर अंकित की गई जो की क्षेत्रीय मानक किस्म 10% अधिक थी।
  • इस किस्म के रस में औसत शर्करा की मात्रा 17.66% और पोल प्रतिशत केन 14.33% होता है।
  • इस किस्म की पेड़ी उत्तम होती है जो कि मानक किस्मों की तुलना में 7.0-12.0% तक अधिक उपज देती है। यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति मध्यम अवरोधी है।
  • इस किस्म का गन्ना मध्यम मोटा तथा हरा-सफेद रंग का होता है। इसका अगोला गहरा हरा तथा पत्ती सीधी चोटी वक्री होती है।

कोलख 11203 (इक्षु-5)

  • किस्म : कोलख 11203 (अगेती), अतत-उच्च शर्करायुक्त अधिक गन्ना उपज
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-पश्चिम क्षेत्र विशेषत: मध्य पश्चिम उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान आदि।
  • परीक्षण के दौरान दस माह की फसल अविधि में इस किस्म के रस में औसत शर्करा की मात्रा 18.41% पायी गई जो कि सवोंत्तम मानक किस्मों जैसे 'कोजे 64' एवं 'को 0238' से भी अधिक थी।
  • इस किस्म की औसत गन्ना उपज 82 टन/है तथा पोल प्रतिशत केन 13.44% पाया गया।
  • यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रतत मध्यम अवरोधी है। इसका गन्ना मध्यम मोटा तथा हरापन सलए हुए हल्के पीले रंग का होता है। इसका अंगोला हरा तथा पत्ती सीधी होती है।

कोलख 11206 (इक्षु-4)

  • किस्म : कोलख 11206 (मध्य-देर), उच्च गन्ना उपज के साथ ही उच्च शर्करा
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-पश्चिम क्षेत्र विशेषत: मध्य पश्चिम उत्तरप्रिेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान आदि।
  • परीक्षण के दौरान इसकी औसत गन्ना उपज 91.5 टन/है पायी गई, जो की मानक किस्मों की तुलना में लगभग 15-25 प्रतिशत तक अधिक थी।
  • इस किस्म में बुआई के 12 माह उपरांत कटाई के समय रस में शकषरा की औसत मात्रा 17.65% एवं पोल प्रतिशत केन 13.42% पाया गया।
  • यह लाल सड़न रोग के प्रति मध्यम अवरोधी किस्म है।
  • इसका गन्ना मध्यम मोटा तथा पीले-हरे रंग का होता है। इसका अंगोला हरा होता है तथा पत्ती सीधी और अग्रभाग पर वक्री होती है।

कोलख 09204 (इक्षु-3)

  • किस्म : कोलख 09204 (मध्य-देर), उच्च गन्ना उपज क्षमता
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-पश्चचम क्षेत्र विशेषत: मध्य पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान आदि।
  • परीक्षण में इसकी औसत गन्ना उपज 82.8 टन/है आँकी गई, जो की क्षेत्रीय मानक किस्मों की तुलना में 10-20% तक अधिक थी।
  • इस किस्म में बुआई के 12 माह उपरांत कटाई के समय रस में शर्करा की मात्रा 17.0% एवं पोल प्रतिशत केन 13.22% पाया गया।
  • इस किस्म की पेड़ी अतिउत्तम होती है तथा इसका गन्ना मध्यम मोटा और हरे रंग का होता है।
  • इसका अगोला गहरे हरे रंग का तथा पत्ती धनुषाकार नीचे की तरफ फैली हुई होती है।
  • यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति मध्यम अविरोधिता से लेकर पूर्ण अविरोधिता की प्रतिक्रिया प्रदर्शित करती है।

कोलख 9709

  • किस्म : कोलख 9709 (अगेती), उच्च शर्करायुक्त
  • संस्तुत क्षेत्र : मध्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
  • इस किस्म की औसत गन्ना उपज 80.0 टन/हे तक बहुत आसानी से प्राप्त की जा सकती है।
  • इसके रस में औसत गन्ना की मात्रा 18.04% तथा पोल प्रतिशत केन 13.36% होता है।
  • यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रतत मध्यम अवरोधी है तथा इसकी पेड़ी उत्तम होती है।
  • अगोला हल्का पीले-हरे रंग का एवं पत्ती धनुषाकार नीचे की तरफ फैली हुई होती है। इसका गन्नासमान्यतः ठोस, मध्यम मोटा तथा सफ़ेद-हरे रंग का होता है।
              
 

कोलख 94184 (बिरेन्द्र)

  • किस्म : कोलख 94184 (अगेती), उच्च शर्करायुक्त
  • संस्तुत क्षेत्र : उत्तर-मध्य के उत्तर-पूर्व के क्षेत्र विशेषत: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चचम बंगाल एवं असम आदि।
  • वर्तमान में इस किस्म की खेती उत्तर प्रदेश व बिहार में बहुत बड़े क्षेत्रफल में की जा रही है। वर्ष 2017-18 में केवल उत्तर प्रदेश में ही इस किस्म द्वारा आच्छादित क्षेत्रफल लगभग 1.43 लाख हेक्टेयर रहा जो किस्म 'को 0238' के बाद दूसरे स्थान पर था।
  • इस किस्म की औसत गन्ना उपज लगभग 75.97 टन/हे और पोल प्रतिशत केन 13.63% है।
  • यह एक उच्च शर्करायुक्त किस्म है, जिसमें बुआई के 10 माह बाद कटाई के समय रस में शर्करा की औसत मात्रा 17.97% होती है।
  • इस किस्म को जल प्लावित क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।
  • इस किस्म की पेड़ी अतिउत्तम होती है और इसका गन्ना मध्यम मोटाई वाला तथा हल्के पीले- हरे रंग का होता है। इस किस्म का अगोला हरा तथा पत्ती ऊर्ध्व (सीधी खड़ी हुई) होती है।
              
 

CoLk 8001

इस प्रजाति की संस्तुति 1988 में उत्तर प्रदेश और गुजरात में व्यावसायिक खेती के लिए की गई। इसकी कुछ विशेषताएँ : मध्य-देर प्रजाति, उच्च शर्करायुक्त , बावक और पेड़ी गन्ने में उच्च उपज क्षमता,यह किस्म बोरर्स के प्रति सहिष्णु है।
 

CoLk 8102

इस प्रजाति की संस्तुति 1996 में उत्तर प्रदेश और बिहार में व्यावसायिक खेती के लिए की गई। इसकी कुछ विशेषताएँ : मध्य-देर , उच्च शर्करायुक्त, अच्छी पेड़ी, मोटे सीधे गन्ने वालि प्रजाति है। यह smut, wilt, ratoon stunting, grassy shoot, leaf scald रोगों की प्रतिरोधी है।

Drought tolerant varieties developed under AICRP (Sugarcane)