ICAR-ISRI organizing ISRICON-2027           गन्ना किस्म कोलख 21201 के बीज का वितरण           A Landmark Contribution in Adding to the Sweetness of Subtropical India CoLk 14201 (IKSHU-10)           गन्ने में प्लासी बेधक कीट परामर्श के संबंध में            Drought contingency plan for sugarcane crop (2026)           District-wise general fertilizer recommendations for major crops in India           Report on Rationalizing Phosphorous Use in India                                                                 

 

पादप सुरक्षा विभाग

1952 में, संस्थान चार अनुभागों सस्य विज्ञान, गन्ना माइकोलॉजी, गन्ना कीट विज्ञान और कृषि इंजीनियरिंग के साथ शुरू हुआ। 1956 में दो अनुभाग मृदा विज्ञान, कृषि रसायन और पादप दैहिकी को जोड़ा गया, जबकि तीसरा अनुभाग वनस्पति शास्त्र और प्रजनन 1969 में शुरू किया गया। इन सभी अनुभागों को पाँचवीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान पूर्ण रूप से विभाग बनाया गया था। 2001 के दौरान 9वे प्लान में पादप रोग और कीट विज्ञान को मिला कर फसल सुरक्षा विभाग बना दिया गया।

विजन

कीटों और रोगों से मुक्ति

मैनडेट

गन्ने और अन्य शर्करा फसलों के कीटों और रोगों के प्रबंधन पर बुनियादी और रणनीतिक शोध

लक्ष्य (मिशन)

लाल सड़न और शीर्ष बेधक के प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ गन्ने और गन्ने के कीटों और रोगों के पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन

प्रमुख क्षेत्र

पौध रोग विज्ञान
  • भौगोलिक वितरण और नई क़िस्मों के विश्लेषण एवं लाल सड़न के महत्वपूर्ण कारकों के शुरुआत के साथ-साथ द्वितीयक प्रसारक के सबंध मेंकोलेटोट्रिचम फाल्कैटम का परिवर्तनशीलता विश्लेषण।
  • प्रेरित सर्वांगी प्रतिरोध के माध्यम से गन्ने के जन्मजात प्रतिरोध में सुधार।
  • गन्ने की प्रमुख बीमारियों के खिलाफ जैव-एजेंट की जैव विविधता की खोज और उनके प्रभावी उपयोग के लिए उपयुक्त वितरण प्रणाली का विकास।
  • गन्ने में उभरती बीमारी की समस्याओं से निपटना, जैसे पीला पत्ती वायरस की बीमारी।
  • जैव-एजेंट के साथ सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ रोग प्रबंधन प्रौद्योगिकियों का सुधार।
  • वास्तविक जीव की पहचान जो म्लानि के कारण के लिए जिम्मेदार हैं।
  • रोग संबंधी संवेदनशीलता और प्रतिरोध के संबंध में प्रमुख रोगजनकों (स्मट, जीएसडी और मोज़ेक) का परिवर्तनशीलता विश्लेषण।
कीटविज्ञान
  • जलवायु में परिवर्तन के संबंध में गन्ना छेदक की जैव-विविधता और भौगोलिक वितरण।
  • गन्ने के कीटों के लिए प्रयोगशाला पालन तकनीक का विकास।
  • गन्ने के एंटोमोपैथोजेन के जैव-संभावना के कीटों के परजीवियों और परभक्षियों के पालन, रखरखाव और उपयोग।
  • उपोष्णकटिबंधीय वातावरण में गन्ना छेदक के खिलाफ जैव-एजेंटों के कुशल उपभेदों का विकास और पहचान।
  • फेरोमोन के माध्यम से गन्ने छेदक के कीटों की निगरानी करना और उन्हें रखना।
  • गन्ने के कीट-परागण के भरण आहार को बढ़ावा देने के लिए गन्ना कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में बेहतर मेजबान की तैनाती।
  • दीमक और सफेद ग्रब की उभरती समस्याओं को दूर करने के लिए स्थान विशिष्ट प्रबंधन मॉड्यूल का विकास।

Contact Person

डॉ दिनेश सिंह, विभागाध्यक्ष
ई-मेल: dinesh.singh2@icar.org.in, मो: 9968246428